Pauri Garhwal

Dhari Devi Temple

धारी देवी मंदिर (Dhari Devi Temple), उत्तराखंड में रहस्यमय और प्राचीन मंदिरों की कोई कमी नहीं है। एक ऐसा ही मंदिर माँ धारी देवी (Maa Dhari Devi Temple) का उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के श्रीनगर से करीब 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह मंदिर अलकनंदा नदी (Alakananda River) के तट पर माँ काली जी को समर्पित है।

Maa Dhari Devi
Maa Dhari Devi

जिसे माता धारी देवी मंदिर कहा जाता है। धारी देवी माँ को उत्तराखंड (uttarakhand) के संरक्षक देवी के रूप में माना जाता हैं, और वह चार धाम के रक्षक के रूप में पूजनीय हैं।

330 मेगावाट के अलकनंदा हाइड्रो इलेक्ट्रिक डैम के निर्माण को रास्ता देने के लिए देवी का मूल मंदिर 16 जून 2013 को पानी में समा गयी और संयोग से, मूर्ति को मूल मंदिर के ऊपर विस्थापित किये जाने के बाद, इस क्षेत्र ने सामना किया, 2004 की सुनामी, 2013 की बाढ़ जो कि देश की सबसे खराब प्राकृतिक आपदाओं में से एक बन गया।

2013 की केदारनाथ आपदा को भुलाया नहीं जा सकता, मौसम विशेषज्ञों की एक टीम द्वारा समझाया गया, इस आपदा का प्रमुख कारण बादल फटना था, लेकिन स्थानीय लोगों के विश्वास को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। 2013 की तबाही के लिए जहां लोगों का मानना है कि माता धारी देवी के प्रकोप से ये महाविनाश हुआ।

माँ धारी देवी मंदिर की पौराणिक कथा (Legend of Maa Dhari Devi Temple )

पौराणिक कथन के अनुसार एक बार भयंकर बाढ़ में कालीमठ मंदिर बह गई थी। लेकिन धारी देवी (Dhari Devi) की प्रतिमा एक चट्टान से सटी होने के कारण धारो गांव में बह कर आ गई। गांववालों को धारी देवी की ईश्वरीय आवाज सुनाई दी थी कि उनकी प्रतिमा को वहीं स्थापित किया जाए।

जिसके बाद गांव वालों ने माता के मंदिर की स्थापना वहीं कर दी। पुजारियों के अनुसार मंदिर में माँ काली की प्रतिमा द्वापर युग से ही स्थापित है। कालीमठ एवं कालीस्य मठों में माँ काली की प्रतिमा क्रोध मुद्रा में है, परन्तु धारी देवी मंदिर में काली की प्रतिमा शांत मुद्रा में स्थित है। लेकिन शांत मुद्रा में दिखने वाली धारी माता के गुस्से को दुनिया ने उस वक्त देखा, जब एकाएक देवभूमि पानी में समा गई।

ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर श्रीनगर से कुछ दूरी पर कलियासौड़ के समीप मां धारी देवी का मंदिर स्थित है। ऋषिकेश से मंदिर करीब 115 किमी की दूरी पर है। धारी देवी को मां शक्ति के रूप महाकाली के रूप में पूजा जाता है। इस प्राचीन मंदिर में धारी गांव के पांडे ब्राहमण मंदिर के पुजारी हैं। वैसे तो भारत में कई चमत्कारों के बारे में आपने सुना होगा।

धारी देवी मंदिर के बारे में रहस्य (mystery about dhari devi temple)

ऐसा ही एक चमत्कार धारी देवी के मंदिर में भी देखने को मिलता है। इस मंदिर में देवी माता दिन में तीन बार अपना रूप बदलती है। लेकिन इनका गुस्सा भी किसी से छुपा नहीं है। कहते हैं केदारनाथ में आया प्रलय धारी देवी के गुस्से का ही नतीजा था। देवभूमि उत्तराखंड के रक्षक के रूप में धारी देवी को जाना जाता है।

इस मंदिर में रोजाना माता तीन रूप बदलती है। मां प्रात:काल कन्या, दोपहर में युवती और शाम को वृद्धा का रूप धारण करती हैं।

Dhari Devi Temple
Dhari Devi Temple

धारी देवी मंदिर (Dhari Devi Temple) श्रीनगर गढ़वाल क्षेत्र में एक बहुत ही प्राचीन सिद्ध पीठ है जिसे ‘धारी देवी’ का सिद्धपीठ कहा जाता है। इसे दक्षिणी काली माता भी कहते हैं। मंदिर में मूर्ति जागृत और साक्षात है। यह सिद्धपीठ श्रद्धालुओं की आस्था और भक्ति का प्रमुख केंद्र है। देवी काली को समर्पित मंदिर यह मंदिर इस क्षेत्र में बहुत पूजनीये है।

धारी देवी मंदिर तक कैसे पहुचें ( How to reach Dhari Devi Temple )

हर साल नवरात्रों के अवसर पर देवी कालीसौर को विशेष पूजा की जाती है। देवी काली के आशीर्वाद पाने के लिए दूर और नजदीक के लोग इस पवित्र दर्शन करने आते रहे हैं। मंदिर के पास एक प्राचीन गुफा भी मौजूद है । यह मंदिर दिल्ली-राष्ट्रीय राष्ट्रीय राजमार्ग 55 पर श्रीनगर से 15 किमी दूर है। अलकनंदा नदी के किनारे पर मंदिर के पास तक 1 किमी-सीमेंट मार्ग जाता है।

Dhari Devi Temple
Dhari Devi Temple
  • फ्लाइट से : जॉली ग्रांट हवाई अड्डा श्रीनगर गढ़वाल क्षेत्र का निकटतम हवाई अड्डा है जो 124 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जॉली ग्रांट एयरपोर्ट दैनिक उड़ानों के साथ दिल्ली से जुड़ा हुआ है। यह से लोकल टैक्सी, बसें आदि उपलब्ध रहते हैं।
  • ट्रेन से : श्रीनगर के निकटतम रेलवे स्टेशन हरिद्वार, ऋषिकेश और देहरादून हैं। देहरादून रेलवे स्टेशन यमुनोत्री से 149 किलोमीटर और ऋषिकेश रेलवे स्टेशन श्रीनगर से 110 किलोमीटर पर स्थित है। यहाँ से टैक्सी और बसें माँ धारी देवी मंदिर (Maa Dhari Devi Temple) के लिए उपलब्ध रहती हैं।
  • सड़क से : माँ धारी देवी मंदिर (Dhari Devi Temple) सीधे सड़कों से पौड़ी, हरिद्वार, ऋषिकेश और देहरादून जुड़ा है। बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर श्रीनगर से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर कलियासौड़ में अलकनन्दा नदी के किनारे सिद्धपीठ मां धारी देवी का मंदिर स्थित है।

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